स्वाध्याय
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १७७
कालनेमि।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १७६
चन्द्रमा-वरूण और वायु-अग्नि का पराक्रम।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १७५
और्वाग्नि की उत्पत्ति।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १७३|१७४
सेना का निरिक्षण।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १७२
भगवान् विष्णु का महासागर रूप में वर्णन।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १७०|१७१
पद्मोद्भव।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १६८|१६९|१७०
सृष्टि।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १६७
भगवान् मार्कण्डेय और भगवान् विष्णु का सम्वाद।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १६६
महाप्रलय।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १६३|१६४|१६५ हिन्दी भावार्थ।
पद्मोद्भव-नारायण
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १६३|१७४|१६५
हिरण्यकशिपु वध, मूल पाठ
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १६१|१६२
नृसिंह।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १६०|१६१
तारक वध।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५९
कार्तिकेय स्तोत्र एवं गाथा।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५७|१५८
वीरक द्वारा देवी की स्तुति।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५५|१५६
आडिवध।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५४, श्लोक ५११ से आगे।
वीरक!
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५४, श्लोक ३७४ से ५१० का भावार्थ।
शिव पार्वती विवाह।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५४, श्लोक संख्या ३७४ से ५१० मूल पाठ
मुनियों द्वारा भगवान् शिव की स्तुति।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५४, श्लोक संख्या ३०१ से ३७३ तक।
ऋषियों और पार्वती का सम्वाद।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५४, श्लोक संख्या १७६ से ३०० तक का भावार्थ ।
रति द्वारा भगवान् शिव की स्तुति।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५४, श्लोक १७६ से ३०० तक मूल पाठ।
नारद जी का हिमाचल को अपनी बात ठीक से समझाना।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५४, श्लोक संख्या ११६ से १७५ तक।
नारद और हिमाचल संवाद।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५४, श्लोक ४७ से ११५ तक।
एकानंशा देवी।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५४, श्लोक संख्या १ से ४६ तक।
देवताओ द्वारा ब्रह्मा जी की स्तुति।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५३, श्लोक संख्या १२७ से २२१ तक का भावार्थ।
तारक जय लाभो।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५३, श्लोक संख्या १२६ तक का भावार्थ।
तारक जयलाभ का श्लोक संख्या १२६ तक का भावार्थ
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५३, मूल पाठ।
तारक जय लाभ।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५१|१५२
ग्रसन वध।
श्रीमत्स्य, अध्याय १५०, श्लोक संख्या १५२ के आगे का हिन्दी भावार्थ।
भगवान् विष्णु द्वारा कालनेमि को परास्त करनि।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५० का श्लोक संख्या १५१ तक का भावार्थ।
कालनेमि पराजय का भावार्थ, श्लोक १५१ तक।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १५० ,मूल पाठ।
कालनेमि पराजयो।
श्रीमत्स्य महापुराण ,अध्याय १४७~१४९ हिन्दी भावार्थ
तारकासुरोपाख्याने (हिन्दी भावार्थ )
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १४७|१४८|१४९
तारकोपाख्यान।
श्रीमत्स्य महापुराण अध्याय १४६
वज्राङ्ग ।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १४५ एवं जीवनमुक्तानंद लहरी
अध्याय १४५ का हिन्दी भावार्थ और जीवनमुक्तानंद लहरी का पाठ।
श्रीमत्स्य महापुराण, अध्याय १४५
मन्वन्तर कल्प वर्णन।
धन्याष्टकम्, निर्वाण मञ्जरी, निर्वाणषट्कम्, प्रौढानुभति
धन्याष्टकम्, निर्वाण मञ्जरी, निर्वाणषट्कम् भावार्थ सहित, "प्रौढानुभति " संस्कृत पाठ ।
आत्मार्पण स्तुति और मायापञ्चकम्।
आत्मार्पण स्तुति का पद २१ से आगे का हिन्दी भावार्थ और माया पञ्चकम्।
आत्मार्पण स्तुति।
पद २० तक के हिन्दी भावार्थ सहित।